जागरूकता की ताकत: पटना के एक कॉलेज की पहल
Prof. Anita Sharma
Social Worker
Published
10 September 2026
पटना के एक प्रमुख कॉलेज में पिछले कुछ वर्षों से युवाओं के बीच नशे की बढ़ती प्रवृत्ति देखी जा रही थी। शिक्षक इस बात से चिंतित थे कि उनके सबसे होनहार विद्यार्थी भी इस जाल में फंस रहे थे।
समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय, कॉलेज प्रशासन ने नशामुक्त बिहार अभियान के तहत एक 'Youth Awareness Taskforce' का गठन किया। इसमें शिक्षकों के साथ-साथ कॉलेज के सीनियर छात्रों को भी शामिल किया गया।
उन्होंने पारंपरिक भाषणों के बजाय नुक्कड़ नाटक, पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिताएं और ओपन माइक सत्र आयोजित किए, जहां छात्रों ने खुलकर नशे के दबाव (Peer Pressure) और मानसिक स्वास्थ्य पर बात की।
सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब कॉलेज ने एक 'Confidential Counseling Helpline' शुरू की। इसके जरिए जो छात्र नशे की लत में थे, वे बिना अपनी पहचान उजागर किए मदद मांग सकते थे। एक साल के भीतर, कॉलेज में नशे से जुड़े मामलों में भारी कमी आई और कई छात्रों ने अपनी लत छोड़कर पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया।
इस पहल ने यह साबित कर दिया कि युवाओं को केवल आदेश देने से काम नहीं चलता, बल्कि उन्हें संवाद और सहानुभूति की जरूरत होती है। जब हम युवाओं को जिम्मेदारी सौंपते हैं, तो वे खुद बदलाव के सबसे बड़े वाहक बन जाते हैं।
