PM Modi Speech On Nasha Mukt Bharat Abhiyaan :- A Programme for Young India and Strong India

Kundan Kumar Singh

Director at Gaon Samaj Foundation

Published

27 September 2026

PM Modi Speech On Nasha Mukt Bharat Abhiyaan :- A Programme for Young India and Strong India
नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार, किसी संस्था या किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है। यह समाज से जुड़ा ऐसा विषय है, जिसके समाधान के लिए परिवार, विद्यालय, महाविद्यालय, सामाजिक संगठन, प्रशासन और सबसे बढ़कर युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। हाल में सामने आए ‘नशामुक्त युवा अभियान’ से जुड़े वीडियो में इसी व्यापक जनभागीदारी की झलक देखने को मिलती है। देश के अलग-अलग हिस्सों में युवाओं द्वारा नशे के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रमों, शपथ अभियानों, रचनात्मक गतिविधियों और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से संदेश को आगे बढ़ाया जा रहा है। मेरे विचार में इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यही है कि इसमें युवा केवल जागरूकता प्राप्त करने वाले व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि जागरूकता के वाहक और अभियान के सक्रिय सहभागी बनने की भूमिका में दिखाई देते हैं। नशे के खिलाफ युवा शक्ति का संकल्प नशामुक्ति का पहला कदम स्वयं नशे से दूर रहने का संकल्प है। लेकिन सामाजिक परिवर्तन के लिए यह संकल्प वहीं समाप्त नहीं होना चाहिए। जब कोई युवा स्वयं नशे से दूर रहने का निर्णय लेने के साथ अपने मित्रों, परिवार और समुदाय को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करता है, तब व्यक्तिगत संकल्प सामाजिक जिम्मेदारी का रूप लेने लगता है। यही कारण है कि युवाओं की भागीदारी नशामुक्ति अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। आज का युवा अपने आसपास के समाज को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। वह कॉलेज में संवाद शुरू कर सकता है, गांव में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर सकता है, अपने मित्रों के बीच सकारात्मक चर्चा कर सकता है और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यापक समुदाय तक संदेश पहुंचा सकता है। 100 सप्ताह तक निरंतर अभियान की सोच वीडियो में 100 सप्ताह तक चलने वाले अभियान का उल्लेख किया गया है। नशे जैसी सामाजिक चुनौती के संदर्भ में निरंतरता का विशेष महत्व है। किसी एक दिन शपथ लेना या एक कार्यक्रम आयोजित कर देना पर्याप्त नहीं है। जागरूकता को लगातार संवाद, गतिविधियों और सामुदायिक भागीदारी से जोड़ना आवश्यक है। लंबी अवधि का अभियान युवाओं, परिवारों और संस्थानों को बार-बार इस विषय से जोड़ने का अवसर देता है। इससे नशामुक्ति केवल किसी विशेष दिवस या आयोजन का विषय न रहकर सामाजिक संवाद का हिस्सा बन सकती है। सोशल मीडिया: युवा संवाद का नया माध्यम आज युवाओं तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। #NashaMuktYuva जैसे डिजिटल अभियानों के माध्यम से युवा अपनी रचनात्मकता का उपयोग नशामुक्ति के संदेश को आगे बढ़ाने में कर सकते हैं। एक छोटा वीडियो, पोस्टर, कविता, स्लोगन या डिजिटल क्रिएटिव भी लोगों के बीच चर्चा शुरू कर सकता है। यहां युवाओं की सबसे बड़ी ताकत उनकी रचनात्मकता और डिजिटल पहुंच है। यदि इस क्षमता को सामाजिक जागरूकता से जोड़ा जाए, तो संदेश स्कूल और कॉलेज के परिसर से निकलकर परिवारों, मोहल्लों, गांवों और डिजिटल समुदायों तक पहुंच सकता है। स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बनें जागरूकता के केंद्र नशे के खिलाफ जागरूकता में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण है। स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र नहीं हैं; वे युवा संवाद और सामाजिक चेतना के भी महत्वपूर्ण मंच हैं। नशामुक्ति को केवल भाषणों तक सीमित रखने के बजाय इसे विभिन्न गतिविधियों से जोड़ा जा सकता है, जैसे— * नशामुक्ति की शपथ * जागरूकता रैली * पोस्टर और स्लोगन प्रतियोगिता * कविता एवं लेखन प्रतियोगिता * नुक्कड़ नाटक * रचनात्मक वीडियो निर्माण * युवा संवाद * स्वास्थ्य एवं जागरूकता शिविर * योग, ध्यान और फिटनेस गतिविधियां ऐसी गतिविधियों का उद्देश्य युवाओं को केवल संदेश सुनाना नहीं, बल्कि उन्हें अभियान का हिस्सा बनाना होना चाहिए। रचनात्मकता भी बन सकती है सामाजिक शक्ति वीडियो में युवाओं को अपनी creativity के माध्यम से नशामुक्ति अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया है। एंथम, स्लोगन राइटिंग और स्ट्रीट प्ले जैसे माध्यम इस दिशा में प्रभावी सामाजिक संचार के साधन बन सकते हैं। एक नुक्कड़ नाटक सीधे किसी गांव या मोहल्ले में लोगों के बीच संवाद पैदा कर सकता है। एक प्रभावी स्लोगन कम शब्दों में बड़ा संदेश दे सकता है। वहीं मोबाइल फोन से बनाया गया एक छोटा वीडियो डिजिटल माध्यमों के जरिए बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच सकता है। इसलिए नशामुक्ति अभियान में युवाओं की रचनात्मक ऊर्जा को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता के संसाधन के रूप में देखना चाहिए। NSS और युवा स्वयंसेवकों की भूमिका NSS सहित विभिन्न युवा स्वयंसेवी नेटवर्क स्थानीय स्तर पर जनजागरूकता को मजबूत करने में योगदान दे सकते हैं। कॉलेज और विश्वविद्यालयों में सक्रिय स्वयंसेवकों के माध्यम से अभियान को स्थानीय समुदायों तक ले जाना संभव है। इससे नशामुक्ति का संदेश केवल बड़े शहरों या बड़े आयोजनों तक सीमित नहीं रहता। एक स्वयंसेवक अपने गांव में संवाद शुरू कर सकता है। युवा समूह स्थानीय खेल गतिविधि के साथ जागरूकता कार्यक्रम जोड़ सकते हैं। छात्र अपने संस्थान में अभियान चला सकते हैं। यही छोटी-छोटी पहल मिलकर व्यापक सामाजिक भागीदारी का आधार तैयार करती हैं। शपथ से आगे बढ़कर जिम्मेदारी नशामुक्ति की शपथ महत्वपूर्ण शुरुआत है, लेकिन वास्तविक चुनौती उसके बाद शुरू होती है। हमें ऐसा वातावरण बनाना होगा जिसमें युवा नशे से दूरी को केवल व्यक्तिगत अनुशासन के रूप में नहीं, बल्कि अपने परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी के रूप में भी देखें। इसका अर्थ यह नहीं कि नशे से प्रभावित व्यक्ति को केवल दोष दिया जाए। जागरूकता के साथ-साथ परिवार का सहयोग, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, परामर्श और उपलब्ध सहायता सेवाओं की जानकारी भी जरूरी है। नशामुक्ति का प्रभावी दृष्टिकोण जागरूकता, रोकथाम, सहयोग और आवश्यकता पड़ने पर सहायता—इन सभी को साथ लेकर चलना चाहिए। स्वास्थ्य, ध्यान और सकारात्मक जीवनशैली वीडियो में स्वास्थ्य जांच और meditation camps जैसी गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है। नशामुक्ति को केवल नशीले पदार्थों से दूरी के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। युवाओं के लिए सकारात्मक और स्वस्थ विकल्पों का निर्माण भी आवश्यक है। खेल, फिटनेस, योग, ध्यान, रचनात्मक गतिविधियां, शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक सेवा जैसी गतिविधियां युवाओं को अपनी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगाने के अवसर देती हैं। यह दृष्टिकोण विशेष रूप से तब महत्वपूर्ण हो जाता है जब हम नशामुक्ति को केवल एक अभियान नहीं, बल्कि स्वस्थ और जिम्मेदार युवा समाज के निर्माण से जोड़कर देखते हैं। स्थानीय भाषा और स्थानीय भागीदारी भारत की विविधता को देखते हुए किसी भी सामाजिक अभियान का संदेश तभी व्यापक रूप से पहुंच सकता है जब वह स्थानीय भाषा और स्थानीय परिस्थितियों से जुड़ता हो। बिहार में हिंदी के साथ-साथ स्थानीय बोलियों और स्थानीय सामाजिक संदर्भों का उपयोग जागरूकता कार्यक्रमों को लोगों के और करीब ला सकता है। गांव में ग्राम सभा और स्थानीय युवा समूह एक प्रभावी माध्यम हो सकते हैं। शहरों में कॉलेज, सामाजिक संगठन और डिजिटल समुदाय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यानी एक बड़े अभियान का संदेश एक जैसा हो सकता है, लेकिन उसे लोगों तक पहुंचाने का तरीका स्थानीय होना चाहिए। बिहार में नशामुक्ति अभियान और युवा शक्ति बिहार में युवाओं की बड़ी आबादी इस अभियान के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक शक्ति है। यदि गांव, पंचायत, कस्बे, शहर, स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों के युवा नशामुक्ति के संदेश को लेकर आगे आते हैं, तो अभियान की पहुंच व्यापक हो सकती है। गांव और पंचायत स्तर पर * ग्राम सभा में नशामुक्ति संवाद * युवा समूहों की बैठक * घर-घर जागरूकता * स्थानीय खेल गतिविधियां * नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रम स्कूल और कॉलेज स्तर पर * नशामुक्ति शपथ * निबंध एवं कविता प्रतियोगिता * पोस्टर और स्लोगन प्रतियोगिता * युवा संवाद * कैंपस एंबेसडर कार्यक्रम * रचनात्मक वीडियो अभियान शहरों में * युवा संवाद * वॉकाथॉन * फिटनेस एवं स्वास्थ्य कार्यक्रम * डिजिटल जागरूकता अभियान * सोशल मीडिया क्रिएटिव कैंपेन समुदाय स्तर पर * अभिभावक संवाद * स्वास्थ्य एवं परामर्श शिविर * सामाजिक एवं स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी * उपलब्ध पुनर्वास एवं सहायता सेवाओं की जानकारी इन गतिविधियों का उद्देश्य केवल कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों में लगातार संवाद और भागीदारी विकसित करना होना चाहिए। नशामुक्त बिहार के लिए युवा क्यों महत्वपूर्ण हैं? युवा किसी भी सामाजिक अभियान के केवल लाभार्थी नहीं होते। वे परिवर्तन के सहभागी भी हो सकते हैं। एक छात्र अपने कॉलेज में चर्चा शुरू कर सकता है। एक युवा स्वयंसेवक अपने गांव में लोगों से संवाद कर सकता है। एक शिक्षक विद्यार्थियों को जागरूक कर सकता है। एक content creator डिजिटल माध्यमों से हजारों लोगों तक सकारात्मक संदेश पहुंचा सकता है। इसीलिए युवाओं को अभियान के केंद्र में रखना महत्वपूर्ण है। नशामुक्त बिहार केवल नशे से दूरी का लक्ष्य नहीं, बल्कि ऐसे सामाजिक वातावरण के निर्माण का प्रयास होना चाहिए जिसमें युवा शिक्षा, कौशल, रोजगार, खेल, रचनात्मकता और समाज निर्माण की दिशा में अपनी ऊर्जा लगा सकें। “नशा छोड़ो, बिहार जोड़ो।” नशे का प्रभाव केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता जो उसका सेवन करता है। इसका असर परिवार, रिश्तों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन पर भी पड़ सकता है। इसलिए नशे से दूर रहने का संकल्प व्यक्तिगत स्तर से शुरू होकर सामाजिक जिम्मेदारी तक पहुंच सकता है। “नशा छोड़ो, बिहार जोड़ो।” इसी सोच को सरल शब्दों में सामने रखता है—नशे से दूरी और समाज से जुड़ाव। Gaonsamaj.com की दृष्टि में युवाओं की सक्रिय भागीदारी इस दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन सकती है। हमें ऐसे प्रयासों को बढ़ावा देना चाहिए जिनमें युवा स्वयं निर्णय लें, स्वयं संवाद करें और अपने समुदाय में जागरूकता की भूमिका निभाएं। नशामुक्ति का संदेश तभी मजबूत होगा, जब वह समाज के बीच से उठे और समाज की भागीदारी से आगे बढ़े।